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शनिवार, 1 अगस्त 2020

Ram pr Rajniti hindi poem

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राम मंदिर पर राजनीति 




Hello दोस्तों मैं देव त्रिपाठी
 आज की ये पोएम अगर आपकी भावनाओं को आहत करती है तो मुझे माफ़ कीजिये क्योंकि ये मेरा personal opinion है क्योंकि मुझे लगा कि इस मुद्दे पर कविता लिखी जानी चाहिए 
जैसा कि आप लोग जानते है भगवान राम के मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है तब मैं इस बात से बहुत खुश हूं लेकिन दुख इस बात का होता है जब हमारे मन्दिर ओर मस्जिद पर आपसी मतभेद खत्म हो गए थे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लेकिन अभी भी कुछ लोग है जो कि इस मतभेद की अग्नि को भड़काने का प्रयास कर रहे है ऐसा मुझे लगता है 
क्योंकि एक मोहम्मद फैज नाम का व्यक्ति मन्दिर की नींव के लिए मिट्टी लेकर आ रहा है मुझे किसी से ािाितराज नही है कि मिट्टी कौन सा रहा है मुझे ािाितराज है राजनीत से षड्यंत्र से क्यों कि इन राजनीति के धुरंधरो को आचि तरह से पता होगा कि इस बात पर जबरदस्त विवाद हो सकता है फिर भी इन लोगों ने ऐसा काम किया ये आपसी मतभेद बढ़ाकर वोट बैंक बनाने की फिराक में है मेरा मत यही कहता है 
धन्यवाद 

राजनीति की चौपड़ में भगवान दाव पर लगे हुए हैं...
स्वार्थ सधा कुछ वोटों पर तभी सेकुलर बने हुए है...
राजनीति के ज्ञाताओं को इतना ज्ञान नही था क्या...
हिन्दू- मुस्लिम बीज वो रहे इस बात से अनजान सभी थे क्या...
यूँ ही न जीत मिली हमको तम्बू में वर्षों तक राम को रखा है...
सेकुलरिज्म का सारा ठेका क्या हमी ने ले रखा है...

भाईचारे की बात न कहना वो हम अपने स्तर से निभाएंगे...
मन्दिर यदि राम का है तो मिट्टी हमी फिर लाएंगे...
हर रिश्ते या हर मुद्दे पर राजनीति नही खेली जाती...
कलुषित मन से कभी प्रभु की रज नही तौली जाती...
मन्दिर के दरवार में अब क्या चौपड़ नही बिछा रखा है...
सेकुलरिज्म का सारा ठेका क्या हमी ने उठा रखा है...

चंपत राय
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मन्दिर निर्माण राम का है तनिक श्रीराम को पढ़ते तुम...
तब गद्दी के खातिर षड़यंत्रों की नींव नहीं पकड़े तुम...
हर धर्म और मजहब का अपना अलग अलग मत है...
देशद्रोही न कहना उनको जो इस बात से असहमत है...
ध्वज पताका पर क्यों तुमने इमामे हिन्द लिखा रखा है...
सेकुलरिज्म का सारा ठेका क्या हमी ने उठा रखा है...

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Dev tripathi

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